• कॉर्पोरेट प्रोफाइल

नया क्या है

कॉर्पोरेट प्रोफाइल

  • वैश्विक रैंकिंग

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    • प्रतिष्ठित प्‍लैट्स रैंकिंग के अनुसार, ओएनजीसी विश्‍व की नंबर 3 अन्‍वेषण एवं उत्‍पादन कंपनी है और प्‍लैट्स की शीर्षस्‍थ 250 वैश्विक कंपनियों में 22वें नंबर पर है।
    • वर्ष 2014 के लिए विश्‍व की सबसे बड़ी कंपनियों की फोर्ब्‍स वैश्विक 2000 सूची में वैश्विक तेल और गैस प्रचालनों के बीच 21वें नंबर पर है, बिक्री (29.6 बिलियन अमेरिकी डालर), लाभ (4;5 बिलियन अमेरिकी डालर), परिसंपत्तियों (53.8 बिलियन अमेरिकी डालर) और बाजार मूल्‍य (46.4 बिलियन अमेरिकी डालर) के आधार पर समग्र सूची में 176वें नंबर पर है।
    • 'खनन, खनिज तेल उत्‍पादन' श्रेणी (पूरे विश्‍व में नंबर 7 – पिछले वर्ष की तुलना में 3 स्‍थान ऊपर) के अंतर्गत फार्चून की सबसे प्रशंसनीय सूची 2014 में एकमात्र प्रमुख भारतीय ऊर्जा कंपनी।
    • वर्ष 2013 के लिए फॉर्चून ग्‍लोबल 500 में 369वें स्‍थान पर है।
    • ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल द्वारा 'निगमित रिपोर्टिंग में पारदर्शिता' में विश्‍व की 105 सबसे बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों के बीच 39वें स्‍थान पर है, जो इसे भारत में सबसे पारदर्शी कंपनी बनाती है।
    • ग्‍लोबल 500 कंपनियों की न्‍यूसवीक ग्रीन रैंकिंग 2016 में 464वें स्‍थान पर है।
  • भारत का सबसे मूल्‍यवान सार्वजनिक क्षेत्र का उद्यम

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      • ओएनजीसी ने तीन श्रेणियों – वर्ष की 'अन्‍वेषण एवं उत्‍पादन कंपनी', 'परियोजना पंबंधन (2000 करोड़ रुपए से अधिक) : वर्ष की कंपनी' और 'वर्ष का अभिनव : दल (आईओजीपीटी द्वारा जीता गया)' में पेट्रोफेड ऑय एंड गैस इंडस्‍ट्री पुरस्‍कार-2011 जीता।
      • ओएनजीसी ने वर्ष 2011-12 के लिए ''सर्वाधिक स्थिर सुरक्षा कार्य-निष्‍पादक पुरस्‍कार'' (ओएनजीसी की राजमुंदरी परिसंपत्ति द्वारा जीता गया) और ''तेल तथा गैस अपतट परिसंपत्तियों के सर्वोत्‍तम समग्र सुरक्षा कार्य-निष्‍पादन'' के लिए तेल उद्योग सुरक्षा निदेशालय (ओआईएसडी) पुरस्‍कार जीते। इसके अलावा, बीजी भारत द्वारा प्रचालित ओएनजीसी, बीजी और रिलायंस के बीच पन्‍ना गैस फील्‍ड में संयुक्‍त उद्यम प्रचालन ने ''सर्वोत्‍तम उत्‍पादन प्‍लेटफॉर्म –प्राइवेट/संयुक्‍त उद्यमकंपनियां'' के लिए ओआईएसडी पुरस्‍कार जीता।
      • ए ओ एन हेविट सर्वोत्‍तम नियोक्‍ता-इंडिया-2013 में 'सर्वोत्‍तम नियोक्‍ता' पुरस्‍कार और 'वॉयस ऑफ इंम्‍पलायी' पुरस्‍कार।
      • 2013 के लिए निगमित सामाजिक जिम्‍मेदारी के लिए स्‍वर्ण म्‍यूर पुरस्‍कार। अपने प्रचालनात्‍मक क्षेत्रों के आसपास के समुदायों के बीच बनी बनाई निगमित सामाजिक जिम्‍मेदारी परियोजनाओं की प्रदायगी में ओएनजीसी के संरचित दृष्टिकोण ने इसे कोवेटेड पुरस्‍कार दिलाया।
      • भारत में ऊर्जा सेक्‍टर में सबसे आकर्षक नियोक्‍ता का रैंडस्‍टड पुरस्‍कार-2013 ।
      • 2011-12 के लिए निगमित सामाजिक जिम्‍मेदारी और प्रत्‍युत्‍तरात्‍मकता की श्रेणी में स्‍कोप मेरिटोरियस पुरस्‍कार की गोल्‍ड ट्रॉफी।
      • कलकत्‍ता में 11 फरवरी, 2014 को आयोजित सर्वोत्‍कृष्‍टता के डब्‍ल्‍यूआईपीएस पुरस्‍कार में महारत्‍न और नवरत्‍न श्रेणी में 'सर्वोत्‍तम उद्यम पुरस्‍कार'।
      • ओएनजीसी के विदेशी प्रचालनों के स्‍कंध ओवीएल ने 19 दिसंबर, 2013 को दैनिक भास्‍कर इंडिया प्राइड अवार्ड में तेल और गैस सेक्‍टर में सर्वोत्‍तम सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम का पुरस्‍कार जीता।
      • सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम सर्वोत्‍कृष्‍टता अवार्ड-2013 में नवरत्‍न और महारत्‍न श्रेणी में मानव संसाधन प्रबंधन सर्वोत्‍कृष्‍टता पुरस्‍कार।
      • एबीपी 'वैश्विक निगमित सामाजिक जिम्‍मेदारी सर्वोत्‍कृष्‍टता और नेतृत्‍व अवार्ड' 2013- ' स्‍वास्‍थ्‍य के क्षेत्रों में सर्वोत्‍तम निगमित सामाजिक जिम्‍मेदारी पद्धतियां' की श्रेणी में ओएनजीसी एकमात्र विजेता था।

  • अपने प्रमुख प्रयासों के जरिए ओएनजीसी भारत की ऊर्जा सुरक्षा का प्रतिनिधित्‍व करता है

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    ओएनजीसी भारत में एकमात्र पूर्णत: एकीकृत पेट्रोलियम कंपनी है, जो संपूर्ण हाइड्रोकार्बन मूल्‍य श्रृंखला के साथ प्रचालनरत है। इसने अकेले ही भारत के हाइड्रोकार्बन क्षेत्र की रचना की है। कुछ प्रमुख संकेतक निम्‍नलिखित हैं:

    • ओएनजीसी ने भारत में 7 उत्‍पादनशील बेसिनों में से 6 बेसिनों की खोज की है।
    • इसे स्‍व-स्‍थाने 7.59 बिलियन टन के हाइड्रोकार्बन आरक्षित भंडार हैं। इसके पास घरेलू रकबों से तेल + तेल समतूल्‍य गैस (ओ+ओईजी) के 2.69 बिलियन मीट्रिक टन (बीएमटी) के अल्‍टीमेट आरक्षित भंडारों के साथ तेल और गैस की 320 से भी अधिक खोजों का श्रेय प्राप्‍त है।
    • इसने कुल मिलाकर 111 फील्‍डों से प्राकृतिक गैस के 4532 बिलियन क्‍यूबिक मीटर (बीसीएम) और खनिज तेल के 851 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) का उत्‍पादन किया है।
    • ओएनजीसी ने भारत सरकार की नई अन्‍वेषण लाइसेंसिंग नीति (एनईएलपी) के अंतर्गत बोली के 8वें चक्र में कुल 235 ब्‍लॉकों में से 121 ब्‍लॉक (50 प्रतिशत से भी अधिक) जीते हैं।
    • ओएनजीसी की पूर्ण स्‍वामित्‍व वाली सहायक कंपनी ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (ओवीएल) भारत की सबसे बड़ी बहुराष्‍ट्रीय कंपनी है, जिसके पास 15 देशों में 30 तेल और गैस परियोजनाएं (जिनमें से 9 उत्‍पादनशील हैं) हैं।
    • यह प्रतिदिन तेल समतूल्‍य के 1.24 मिलियन बैरल से भी अधिक उत्‍पादन करता है, जो भारत के घरेलू उत्‍पादन का 64 प्रतिशत से भी अधिक योगदान करता है। इसमें से उत्‍पादित खनिज तेल का 75 प्रतिशत से भी अधिक उत्‍पादन हलका और मीठा है।
    • कंपनी के पास भारत में हाइड्रोकार्बन रकबों का सबसे बड़ा हिस्‍सा है (पीईएल क्षेत्रों में 51 प्रतिशत और एमएल क्षेत्रों में 67 प्रतिशत)।
    • ओएनजीसी के पास भारत की कुल रिफाइनिंग क्षमता का लगभग 1/10 भाग है।
    • ओएनजीसी के पास एलएनजी में हितों के साथ और उत्‍पाद परिवहन व्‍यवसाय के साथ एक पूरी तरह एकीकृत हाइड्रोकार्बन मूल्‍य श्रृंखला संरचना है।
    • यह वैश्विक रूप से मान्‍यताप्राप्‍त प्रमाणनों के साथ मान्‍यताप्राप्‍त सभी प्रचालनरत अपतट और अभितट संस्‍थापनाओं (40) वाला विश्‍व का एक अनूठा संगठन है।
  • प्रतियोगितात्‍मक शक्ति

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    • सभी खरीद तेल मीठे हैं और अधिकांश (76 प्रतिशत) हलके हैं, जिनमें सल्‍फर के प्रतिशत का रेंज 0.02-0.10, एपीआई सघनता की रेंज 260-460 है और इसलिए यह बाजार में प्रीमियम आकर्षित करता है।
    • सुदृढ़ बौद्धिक संपदा आधार, सूचना, ज्ञान, कौशल और अनुभव।
    • प्रतियोगितात्‍मक एनईएलपी चक्रों सहित अन्‍वेषण लाइसेंसों की अधिकतम संख्‍या। ओएनजीसी ने एनईएलपी के 8 चक्रों में अवार्ड किए गए 235 ब्‍लॉकों (50 प्रतिशत से भी अधिक) में से 121 ब्‍लॉक जीते हैं।
    • ओएनजीसी के पास भारत में 26,600 किलोमीटर से भी अधिक की पाइपलाइनें हैं और वह इसे प्रचालित करता है, जिनमें उप-समुद्रीय पाइपलाइनें शामिल हैं। भारत में कोई अन्‍य कंपनी इस मार्ग की लंबाईके 50 प्रतिशत में भी प्रचालन नहीं करती।
  • भावी योजना 2030 (पीपी 2030)

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    पीपी 2030 अगले दो दशकों में ओएनजीसी की वृद्धि के लिए रोडमैप अंकित करती है। इसका उद्देश्‍य वर्तमान 2 प्रतिशत की व़द्धि दर की तुलना में 4-5 प्रतिशत वृद्धि के साथ योजना अवधि में ओएनजीसी के उत्‍पादन को दुगुना करना है। भौतिक हिसाब से भावी योजना 2030 के अंतर्गत अपेक्षाओं का उद्देश्‍य निम्‍नलिखित है:

    • प्रति वर्ष तेल और तेल समतूल्‍य गैस (ओ + ओईजी) के 130 एमएमटीओई का उत्‍पादन और साबित हुए आरक्षित भंडारों की 1,300 एमएमटीओई से अधिक की वृद्धि।
    • 2030 तक प्रति वर्ष अंतर्राष्‍ट्रीय ओ+ओईजी उत्‍पादन को छह गुना करके ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (ओवीएल) को आगे बढ़ाना।
    • नए गैर-परंपरारगत स्रोतों जैसे शाले गैस, सीबीएम, गहन जल और एचपीएचटी (उच्‍च दबाव और उच्‍च तापमान) भंडारों से आने वाले, भारत में प्रति वर्ष ओ+ओईजी का उत्‍पादन 20 एमएमटीओई से अधिक करना।
    • एलएनजी के 9 एमपीटीए और न्‍यूक्लियर, सौर तथा पवन से 6.5 मेगा वाट से अधिक बिजली उत्‍पादन करना।
    • पेट्रोकेमिकल्‍स में डाउनस्‍ट्रीम इंटीग्रेशन प्राप्‍त करने के लिए लक्षित निवेशों और रिफाइनिंग क्षमता को 20 एमएमटीपीए से ऊपर ले जाना।
  • विदेशों में इक्विटी ऑयल प्राप्‍त करना

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    ओएनजीसी विदेश, जो पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रणाधीन भारत सरकार का एक अनुसूची 'क' श्रेणी का केंद्रीयसार्वजनिक क्षेत्रका उद्यम (सीपीएसई) है, पूर्ण स्‍वामित्‍व वाली सहायक कंपनी है और ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) का एक विदेशी स्‍कंध है, भारत की प्रमुख राष्‍ट्रीय तेल कंपनी है। ओएनजीसी विदेश का प्राथमिक व्‍यवसाय भारत के बाहर तेल और गैस के रकबों की संभावना का पता लगाना है, जिसमें तेल और गैस का अन्‍वेषण, विकास और उत्‍पादन शामिल है।

    ओएनजीसी विदेश का अधिनिगमन 05 मार्च, 1965 को हाइड्रोकार्बन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के रूप में ईरान में रोस्‍तम और रक्ष तेल फील्‍डों का अन्‍वेषण और विकास करने के लिए तथा इराक में सेवा संविदा आरंभ करने के लिए किया गया था। इस कंपनी को विदेश में ओएनजीसी की विशेषज्ञता का विपणन करने के मुख्‍य उद्देश्‍य से 15 जून, 1989 को ओएनजीसी विदेश लिमिटेड के रूप में पुनर्नामित किया गया था। 90 के दशक में कंपनी मिश्र, यमन, ट्यूनिशिया और वीयतनाम में सीमित अन्‍वेषण क्रियाकलापों में लगी हुई थी।

    ओएनजीसी विदेश के रूप में अपने नए अवतार में कंपनी ने 90 के दशक के बीच में विदेशों में तेल और गैस की परिसंपत्तियों की गुणवत्‍ता प्राप्‍त करने पर अपने ध्‍यान केंद्रण को अभिमुख किया। ओएनजीसी विदेश, जिसके पास वर्ष 2000 में एक परिसंपत्ति थी, ने धीरे-धीरे अंतर्राष्‍ट्रीय परिप्रेक्ष्‍य में सर्वोत्‍तम कंपनी के रूप में प्रतियोगिता करने में सफलता प्राप्‍त की और उत्‍तरवर्ती वर्षों में पूरे विश्‍व में अनेक बड़े लेन-देन कर सकी। वर्तमान में ओएनजीसी विदेश के स्‍वामित्‍व में 16 देशों में 33 तेल और गैस परिसंपत्तियों में सहभागिता हित हैं और यह भारत में तेल और गैस के उत्‍पादन में क्रमश- 14.5 प्रतिशत और 8 प्रतिशत का योगदान करती है। आरक्षित भंडारों और उत्‍पादन के हिसाब से ओएनजीसी विदेश भारत की नंबर 2 सबसे बड़ी पेट्रोलियम कंपनी है, जिसका नंबर केवल अपनी मूल कंपनी ओएनजीसी के बाद आता है।

    ओएनजीसी विदेश ने तेल और गैस प्रचालनों में वर्ष 2002-03 में ओ+ओईजी के 0.252 एमएमटी की तुलना में वर्ष 2013-14 में तेल और तेल समतूल्‍य गैस के 8.36 एमएमटी का उत्‍पादन किया। 31 मार्च, 2014 तक ओएनजीसी विदेश का समुद्रपारीय संचित निवेश 22 बिलियन अमेरिकी डालर को पार कर गया था।


  • प्रौद्योगिकी के अग्रणी

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    • अति आधुनिक भूकम्‍पीय आंकड़ा संग्रहण, प्रासेसिंग और व्‍याख्‍या संबंधी सुझाव।
    • विश्‍व में शीर्षस्‍थ दस वर्चुअल रिअलिटी व्‍याख्‍या सुविधाओं में से एक का इस्‍तेमाल करता है।
    • ट्रांसओसन, शूमबर्गर, हैलिबर्टन, बेकर ह्यूग्‍स, आईपीआर, पेट्रोब्रास, नॉर्स्‍क, ईएनआई और शेल के साथ गठबंधन।
    • एशिया में सबसे बड़ी ईआरपी कार्यान्‍वयन करने वाली कंपनियों में से एक।
  • अवसंरचना और सुविधाओं की श्रेणी में सर्वोत्‍तम

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    • यह कंपनी 27 भूकंपीय कर्मी दलों के साथ प्रचालन करती है, 240 अपतट उत्‍पादन संस्‍थापनाओं, 202 अभितट संस्‍थापनाओं का प्रबंधन करती है, 77 वेधन (जमा 44 किराए पर लिए गए) और 58 वर्क ओवर रिगों (जमा 30 किराए पर लिए गए) का प्रबंधन करती है। यह भारत में 26598 किलोमीटर से भी अधिक पाइपलाइन के स्‍वामित्‍व वाली और उनका प्रचालन करता है, जिसमें 4,500 किलोमीटर की उप-समुद्री पाइप लाइनें शामिल हैं।
    • ओएनजीसी ने सभी इन्‍फोकॉम प्रणालियों के आधुनिकीकरण, विस्‍तारण और एकीकरण के लिए सर्वोत्‍तम श्रेणी की व्‍यवसाय पद्धतियां अपना ली हैं।
  • आगे का मार्ग

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    ओएनजीसी निम्‍नलिखित के साथ एक एकीकृत ऊर्जा प्रदायक बनने की ओर अग्रसर है:

    • नई खोजें और तीव्र मार्ग विकास के साथ ।
    • विदेशों से इक्विटी तेल
    • डाउनस्‍ट्रीम मूल्‍य वृद्धि और अग्रगामी एकीकरण
    • अति आधुनिक प्रौद्योगिकी और वैश्विक सर्वोत्‍तम पद्धतियों का सहारा लेना
    • ऊर्जा के नए स्रोत
    • लघु और सीमांतक फील्‍डों से उत्‍पादन
    • ओएनजीसी ने गैर-परंपरागत गैसों जैसे कोल बेड मीथेन (सीबीएम), भूमिगत कोयला गैसीकरण (यूसीजी), शाले गैस और गैस हाइड्रेट्स, या गैर-परंपरागत ऊर्जा स्रोतों जैसे पवन, सौर आदि के जरिए गैर-परंपरागत ऊर्जा स्रोतों का पता लगाने के लिए संगठित पहलें आरंभ की हैं।
    • ''ओएनजीसी ऊर्जा केंद्र न्‍यास'', जो गैर-परंपरागत ऊर्जा स्रोतों में हॉलिस्टिक अनुसंधान के लिए ओएनजीसी द्वारा सृजित एक समर्पित केंद्र है, ने तीन परियोजनाए अर्थात थर्मो-केमिकल रिऐक्‍टर फॉर हाइड्रोजन, जियो-बायो रिऐक्‍टर और फ्यूल सेल्‍स आरंभ की हैं। ओएनजीसी ने गुजरात में पहले ही एक 50 मेगावाट का पवन फार्म संस्‍थापित कर दिया है और राजस्‍थान में 100 मेगा वाट का एक और अन्‍य पवन फार्म स्‍थापित करने की योजना चल रही है। ओएनजीसी ने गुड़गांव में सौर ऊर्जा केंद्र, नवीन तथा नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) परिसर में 3 सौर थर्मल इंजन भी स्‍थापित किए हैं।
  • मूल्‍य श्रृंखला एकीकरण

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    • ओएनजीसी की बीमार मंगलौर रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल्‍स लिमिटेड (एमआरपीएल), जो मार्च 2003 में 9.69 एमएमटी क्षमता की अकेली रिफाइनरी थी, में इक्विटी में अधिकांश स्‍टेक की खरीद ओएनजीसी के एकीकृत व्‍यवसाय मॉडल का एक अलग प्रमाण है। अन्‍वेषण और उत्‍पादन प्रचालन के अपेक्षाकृत उच्‍चतर जोखिम के अल्‍पीकरण में इस कंपनी को अपेक्षित सुविधा प्रदान करने के अलावा, इस डील ने भारतीय व्‍यवसाय इतिहास में एक उदाहरण प्रस्‍तुत किया है, जहां सार्वजनिक क्षेत्र के एक उपक्रम ने संयुक्‍त स्‍टॉक की कंपनी का अधिग्रहण कर लिया है और एक वर्ष के रिकार्ड समय में इसे पूरी तरह बदल दिया है।
    • आगे बढ़ते हुए ओएनजीसी ने मूल्‍य – मल्‍टीप्‍लायर एकीकरण परियोजनाओं जैसे रिफाइनरी, एलएनजी, पेट्रोकेमिकल्‍स, पावर, एसईजैड आदि के प्रति संरचित पहलें आरंभ की हैं ताकि पूरी हाइड्रोकार्बन मूल्‍य श्रृंखला में इसकी मौजूदगी बनी रहे।
  • निगमित सामाजिक जिम्‍मेदारी

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    एक 'जिम्‍मेदार अग्रणी के रूप में अपनी भूमिका को स्‍वीकार करते हुए ओएनजीसी असुरक्षित और सुविधावंचित व्‍यक्तियों के जीवन में सकारात्‍मक, दृश्‍य अंतर बनाने के लिए अपने प्रयास जारी रखे हुए है। एक व्‍यवसाय पैराडिगम के साथ, जो लोगों के कल्‍याण, सामाजिक उन्‍नति और पर्यावरणीय संरक्षण के परस्‍पर-जुड़े हुए विज़न पर आधारित है, ओएनजीसी ने 2011-12 में निम्‍नलिखित ध्‍यान-केंद्रित क्षेत्रों में विकासात्‍मक आवश्‍यकताओं को पूरा करना जारी रखा:

    • व्‍यावसायिक पाठ्यक्रमों सहित शिक्षा;
    • स्‍वास्‍थ्‍य सुरक्षा;
    • उद्यमिता (स्‍वयं-सहायता और आजीविका सृजन) योजनाएं;
    • अपने प्रचालनात्‍मक क्षेत्रों के आसपास अवसंरचना सहायता सडकें, पुल, स्‍कूल, अस्‍पताल;
    • पर्यावरण संरक्षण, पारिस्थितिकीय संरक्षण, संवर्धन;
    • विरासत के स्‍थलों का संरक्षण, यूनेस्‍को के विरासत स्‍मारक आदि;
    • विरासत, कला और संस्‍कृति के परिरक्षण के लिए कारीगरों, शिल्पियों, संगीतकारों, कलाकारों आदि को बढ़ावा देना;
    • महिला सशक्‍तीकरण,बालिका विकास, लिंग संवेदी परियोजनाएं;
    • भूमिगत जल पुनर्भरण सहित जल प्रबंधन;
    • शारीरिक और मानसिक रूप से विकलांग व्‍यक्तियों के लिए पहलें;
    • संगोष्ठियों, सम्‍मेलनों, कार्यशालाओं आदि को प्रायोजित करना; और
    • खेलकूद/खिलाडि़यों को प्रोत्‍साहित करना, खेलकूद/खिलाडि़यों को प्रोत्‍साहित करने वाली एजेंसियों की सहायता करना।
  • निगमित अभिशासन

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    ओएनजीसी ने निगमित अभिशासन और अपनी पद्धतियों, जिनमें पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बहु-स्‍तरीय रोकथाम पर नियंत्रण शामिल है, के प्रति संरचित पहलें आरंभ की हैं। निगमित अभिशासन के एक भाग के रूप में कार्यान्वित किए जाने के लिए आवश्‍यक अनिवार्य उपायों के अलावा ओएनजीसी ने इस संबंध अतिरिक्‍त उपाय किए हैं और व्हिसल ब्‍लोअर नीति, लेखापरीक्षाके कार्यचालन पर वार्षिक रिपोर्ट और नैतिकता समिति, निगमित अभिशासन पर एमसीए के स्‍वैच्छिक दिशानिर्देश, पूरे उद्यम में जोखिम प्रबंधन (ईआरएम) का ढांचा कार्यान्वित किया है।

  • स्‍वास्‍थ्‍य, सुरक्षा और पर्यावरण

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    ओएनजीसी ने अपनी सभी प्रचालनात्‍मक इकाइयों में प्रतिष्ठित प्रमाणन एजेंसियों द्वारा प्रमाणित और ओएनजीसी की सुविधाओं में आईएसओ 9001, ओएचएसएएस 18001 और आईएसओ 14001 की शर्तों के अनुरूप वैश्विक रूप से मान्‍यताप्राप्‍त क्‍यूएचएस की प्रबंधन प्रणालियों को कार्यान्वित किया है। अंतर्राष्‍ट्रीय पद्धति के अनुरूप पूरे संगठन में एकरूपता बनाए रखने के लिए घटनाओं की रिपोर्टिंग पर निगमित दिशानिर्देश, छानबीन और सिफारिशों की मॉनीटरिंग तैयार की गई है और उसे कार्यान्वित किया गया है।

    2011-12 के दौरान घटनाओं में 20 प्रतिशत की कमी प्राप्‍त की गई है। 131 पर्यावरणीय अनुमतियां (ईसी/टीओआर) प्राप्‍त की गई हैं। ऊपरी हिमालयी क्षेत्रमें4 लाख रिंगल बांस के पौधे लगाए गए हैं। बायोरीमेडिएशन का इस्‍तेमाल करके 25000 एमटी तैलीय अपशिष्‍ट को संसाधित किया गया है। 412 संस्‍थापनाओं को क्‍यूएचएसई से प्रमाणित कराया गया है। एचएसई कार्य-निष्‍पादन के लिए 240 प्रचालनात्‍मक इकाइयों की लेखापरीक्षा की गई है, एचयूईटी पर 130 कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया गया है, 14 एचएसई जागरूकता कार्यक्रम पूरे किए गए हैं।

    पूरे ओएनजीसी में एकसमान आपदा प्रबंधन के लिए निगमित आपदा प्रबंधन योजना और दिशानिर्देश तैयार किए गए हैं। ओएनजीसी ने अपतट प्रचालनों के लिए तैनात किए गए कर्मचारियों के लिए व्‍यावसायिक स्‍वास्‍थ्‍य शारीरिक फिटनेस के मापदंड भी तैयार किए हैं। व्‍यावसायिक स्‍वास्‍थ्‍य मॉड्यूल को अब एसएपी सिस्‍टम पर संस्‍थापित किया गया है।

  • मानव संसाधन

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    ओएनजीसी के पास कुशल और प्रतिभावान व्‍यवसा‍यविदों का एक विशाल पूल है, जो कंपनी के लिए सबसे मूल्‍यवान परिसंपत्ति है। ओएनजीसी के 32,909 कर्मचारियों (31 मार्च, 2012 को यथास्थिति) ने कंपनी के सर्वोत्‍कृष्‍ट कार्य-निष्‍पादन के लिए अपने आपको समर्पित किया है। ओएनजीसी व्‍यापक चिकित्‍सा सुरक्षा, शिक्षा, आवास और सामाजिक सुरक्षा द्वारा कर्मचारियों और उनके परिवारों को कुछ कल्‍याण लाभ प्रदान करता है।