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लाभांश नीति

Dividend Policy

लाभांश की घोषणा बोर्ड द्वारा की गई सिफारिशों के आधार पर पणधारियों की वार्षिक बैठक में की जाती है। बोर्ड, हमारे सदस्‍यों को भुगतान किए जाने वाले लाभांशों की सिफारिश अपने विवेक पर कर सकता है। बोर्ड अंतरिम लाभांशों की घोषणा भी कर सकता है। आमतौर पर लाभांश के लिए कोई सिफारिश करने से पहले बोर्ड द्वारा जिन कारकों पर विचार किया जा सकता है, उनमें भावी पूंजी व्‍यय योजनाएं, वित्‍तीय वर्ष के दौरान अर्जित लाभ, वैकल्पिक स्रोतों से निधियां जुटाने की लागत, नकदी प्रवाह की स्थिति और लाभांश पर कर सहित लागू होने वाले कर शामिल हैं। परंतु यह इन तक ही सीमित नहीं है और यह नीचे विनिर्धारित सरकारी दिशानिर्देशों की शर्त के अधीन भी है।

भारत सरकार से प्राप्‍त दिनांक 11 फरवरी, 1998 के दिशानिर्देशों के अनुसार सभी लाभ कमाने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, जो अनिवार्य रूप से वाणिज्यिक उद्यम हैं, को इक्विटी पर 20 प्रतिशत के न्‍यूनतम लाभांश या करोपरांत लाभ के 20 प्रतिशत के न्‍यूनतम लाभांश के भुगतान की घोषणा करनी चाहिए। तेल, पेट्रोलियम, रसायन और हमारे जैसे अन्‍य अवसंरचना सेक्‍टरों में उद्यमों के संबंध में न्‍यूनतम लाभांश का भुगतान करोपरांत लाभ का 30 प्रतिशत होना चाहिए।