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नया क्या है

एचएसई

हाइड्रोकार्बन के अन्‍वेषण और उत्‍पादन में आसपास के वातावरण के साथ निकट की प्रतिक्रिया और जोखिम शामिल होता है। आसपास के वातावरण और कार्यचालन की सुरक्षा करने के लिए ओएनजीसी ने एक सुपरिभाषित एचएसई नीति अपनाई है, जिसमें व्‍यावसायिक स्‍वास्‍थ्‍य, सुरक्षित प्रचालन और प्रदूषण नियंत्रण पर ध्‍यान केंद्रित किया गया है।

सांविधिक अनुपालन : अपने प्रचालन और सुरक्षा संबंधी अपेक्षाएं पूरी करने में ओएनजीसी भारत में तेल एवं गैस के अन्‍वेषण और उत्‍पादन से संबंधित उप-नियमों का पालन करता है, विशेष रूप से खान सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएमएस) और तेल उद्योग सुरक्षा निदेशालय (ओआईएसडी) के नियमों का। प्रचालनात्‍मक आवश्‍यकताएं पूरी करने के लिए खतरनाक अपशिष्‍ट (प्रबंधन और हैंडलिंग) नियमावली के नियम 3(ग() और 5(5) के अंतर्गत प्राधिकरण और जन अधिनियम की धारा 25 के अंतर्गत, वायु अधिनियम की धारा 21 के अंतर्गत सभी सांविधिक सहमतियां प्राप्‍त की गई हैं। सभी प्रतिबंध-शर्तों की मॉनीटरिंग की जाती है और संबंधित विनियामक एजेंसियों को समय से सूचित किया जाता है।

आईएसओ प्रमाणित : ओएनजीसी की सभी संस्‍थापनाओं में आईएसओ 9001, ओएचएसएएस 18001 और आईएसओ 14001 की शर्तों पर आधारित और तृतीय पक्ष द्वारा प्रमाणित एक एकीकृत प्रबंधन प्रणाली है। एकीकृत प्रबंधन प्रणाली सन 2004 से स्‍व-स्‍थाने है। सभी प्रचालन सुविधाएं 2004-05 से आईएसओ 9001 के प्रति प्रमाणित की गई थीं। आज 412 कार्यचालन इकाइयों में तृतीय पक्ष प्रमाणित एकीकृत क्‍यूएचएसई प्रबंधन प्रणाली है।

निगमित पर्यावरण नीति : ओएनजीसी की पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली शीर्ष द्वारा संचालित, प्रभावी और गतिशील है। प्रदूषण की रोकथाम और पर्यावरण के संरक्षण के लिए शीर्षस्‍थ प्रबंधन की प्रतिबद्धता, अनन्‍य निगमित पर्यावरण नीति विवरण में स्‍पष्‍ट है, जिसमें प्रतिबद्धता का उल्‍लेख किया गया है।

नवीकरणयोग्‍य ऊर्जा : निरंतर वृद्धि पर ओएनजीसी का हॉलिस्टिक ध्‍यान-केंद्रण ऊर्जा के नवीकरणयोग्‍य स्रोतों, हमारे आंतरिक कार्बन फुटप्रिंट को कम करने और गैर-परंपरागत हाइड्रोकार्बन का अन्‍वेषण करने को आगे बढ़ाने पर इस पर जोर देने को सुनिश्चित करता है। हम भुज, गुजरात में सफलतापूर्वक पहले से कार्य कर रही एक 51 मेगा वाट इकाई के अलावा राजस्‍थान में एक 102 मेगा वाट पवन फार्म स्‍थापित कर रहे हैं। यह योजनाबद्ध निवेश लगभग 8 बिलियन है और इस संयंत्र के 2014-15 तक संस्‍थापित कर लिए जाने की संभावना है।

ऊर्जा संरक्षण : ओएनजीसी के पास एक सुपरिभाषित ऊर्जा नीति है, जो ऊर्जा संरक्षण के विभिन्‍न पहलुओं पर ध्‍यान केंद्रित करती है। पर्यावरण-अनुकूल और ऊर्जा दक्ष प्रौद्योगिकियों को आरंभ करने के परिणामस्‍वरूप वर्ष 2011-12 के दौरान 409.23 करोड़ रुपए की अनुमानित बचत हुई है।

हरित भवन : ओएनजीसी इस बात को स्‍वीकार करता है कि भवनों का उनके पूरे जीवन चक्र पर प्रमुख पर्यावरणीय प्रभाव होता है। इसलिए ओएनजीसी ने हरित भवन निर्माण करने की संकल्‍पना आरंभ की है, जिसका सार यह होगा कि जीआरआईएचए (एकीकृत पर्यवास आकलन के लिए हरित रेटिंग) के दिशानिर्देशों के उचित अनुपालन से एक एकीकृत और वैज्ञानिक तरीके से इन सभी मुद्दों का हल निकलेगा। निरंतर विकास के प्रति इसकी अपनी प्रतिबद्धता के भाग के रूप में ओएनजीसी ने दिल्‍ली, मुंबई, कोलकाता और देहरादून में हरित भवनों का विकास आरंभ किया है। बेसलाइन भवनों की तुलना में इन भवनों से 50 से 60 प्रतिशत ऊर्जा की बचत, लगभग 30 प्रतिशत तक जल की बचत, 100 प्रतिशत वर्षाजल संरक्षण और निस्‍सरण शून्‍य सीवेज होने की संभावना है।

जैव-विविधता संरक्षण : पर्यावरणीय विधिक शर्तों का अनुपालन करने के अलावा, एक जिम्‍मेदार निगमित नागरिक के रूप में ओएनजीसी ने प्रकृति के संरक्षण के लिए और अपने प्रचालनों के प्रभाव को न्‍यूनतम करने के लिए अनेक पहलें की हैं। प्रचालनात्‍मक क्षेत्रों में और प्रचालनात्‍मक क्षेत्रों के बाहर ओएनजीसी द्वारा की गई विभिन्‍न पहलें निम्‍नलिखित हैं:

मैनग्रोव वृक्षारोपण : ओएनजीसी ने प्रचालनात्‍मक क्षेत्रों में गहन मैनग्रोव वृक्षारोपणअभियान आरंभ किया है। इस परियोजना के पहले चरण में अंकलेश्‍वर में धादर नदी के तट के साथ-साथ कटाव-संभावित क्षेत्र में 12 लाख पौधे और लगभग 5 लाख बीज तथा प्रोपुलस पौधे लगाए गए थे। अंकलेश्‍वर में ''मैनग्रोव रेस्‍टोरेशन और संरक्षण शिक्षा परियोजना'' के चरण-1 की सफलता के पश्‍चात ओएनजीसी ने अंकलेश्‍वर और हजीरा में मैनग्रोव वृक्षारोपण का कार्य निरंतर किया है।

रिंगल वृक्षारोपण : हम भुरभुरे ऊपरी हिमालय क्षेत्र में रिंगल बांस के पौधे लगाने के लिए एक दीर्घावधि परियोजना पर काम कर रहे हैं, जो प्रधान मंत्री द्वारा जलवायु परिवर्तन के लिए राष्‍ट्रीय कार्य योजना में रेखांकित क्षेत्र पर भी ध्‍यान केंद्रित करती है। यह परियोजना 5 वर्ष की अवधि से अधिक अवधि की है और यह 730 हेक्‍टेयर का क्षेत्र कवर करती है।

पूर्वी स्‍वैम्‍प हिरण परियोजना : ओएनजीसी देश के पूर्वोत्‍तर क्षेत्र की पर्यावरण प्रणाली के संरक्षण के लिए भी काम कर रहा है, विशेष रूप से असम राज्‍य की पर्यावरण प्रणाली के संरक्षण के लिए। ऊपरी असम में काजीरंगा का क्षेत्र प्रसिद्ध एक सींग वाले गैंडे और पूर्वी समैम्‍प हिरण का घर है। यह काजीरंगा राष्‍ट्रीय पार्क में पाए जाने वाले पूर्वी सवैम्‍प हिरण के एकमात्र बचे पूल का घर भी है।

बायोरीमेडिएशन : नैत्‍यक प्रचालनों के दौरान सृजित टैंक बॉटम स्‍लज और ऐक्सिडेंटल तेल रिसाव पर्यावरण के लिए खतरा उत्‍पन्‍न करते हैं। इसलिए ओएनजीसी ने निर्णय लिया है कि निपटान और उपचार के लिए पर्यावरण-अनुकूल विकल्‍पों की तलाश की जाए। ओएनजीसी ने जैव-प्रौद्योगिकी विकल्‍प अर्थात बायोरीमे‍डिएशन की खोज की है, जिसमें स्‍वदेशी माइक्रोआर्गेनिज्‍म अलग-अलग किए जाते हैं, समृद्ध किए जाते हैं और इस क्षेत्र में अनुप्रयोग के लिए बड़े पैमाने पर काम में लगाए जाते हैं। बायोरीमेडिएशन पर यह परियोजना चलाने के लिए आवश्‍यक प्रौद्योगिकी और संसाधनों की आपूर्ति हेतु ओएनजीसी ने ऊर्जा एवं संसाधन (टीईआरआई, इंडिया) के साथ सहयोग किया है।

सुरक्षा

जोखिम आकलन और नियंत्रण

ओएनजीसी ने ओएचएसएएस 18001, जो तृतीय पक्ष द्वारा प्रमाणित है, पर आधारित एसएमएस विकसित किया है। सभी खतरों की पहचान की जाती है और संबंधित खतरों का मूल्‍यांकन किया जाता है, उनकी मात्रा जांची जाती है और सुसंगत कार्य प्रक्रिया तथा प्रबंधन योजनाओं के जरिए स्‍वीकार्य स्‍तर पर लाया जाता है। आपातकालिक तैयारी प्रणाली का एक भाग है।

अपने प्रचालनात्‍मक खतरे का प्रबंधन करने के लिए ओएनजीसी पांच मूलभूत कदम उठाता है:

  1. खतरे की पहचान करता है।
  2. खतरे का मूल्‍यांकन करता है।
  3. नियंत्रण उपाय तय करता है।
  4. नियंत्रण उपाय कार्यान्वित करता है।
  5. मॉनीटर और समीक्षा करता है।

पेट्रोलियम सुरक्षा स्‍वास्‍थ्‍य और पर्यावरणीय प्रबंधन संस्‍थान (आईपीएसएचईएम), तेल एवं गैस उत्‍पादन प्रौद्योगिकी संस्‍थान (आईओजीपीटी) और वेधन प्रौद्योगिकी संस्‍थान (आईडीटी) के निकट सहयोग से एचएजैडओपी और ओआरए अध्‍ययनों के लिए इंजीनियरी तथा महासागर प्रौद्योगिकी संस्‍थान (आईईओटी) एक नोडल एजेंसी है।

कार्यस्‍थान पर सुरक्षा एवं स्‍वास्‍थ्‍य संस्‍कृति सृजित करने और बनाए रखने के लिए किए गए प्रयास:

ओएनजीसी के कर्मचारियों में बीचएचएसई संस्‍कृति का आत्‍मसात करने के लिए पूरे संगठन में विभिन्‍न कार्यक्रम आरंभ किए गए हैं। 04 मार्च को राष्‍ट्रीय सुरक्षा दिवस के अवसर पर हर वर्ष सुरक्षा जागरूकता अभियान आयोजित किया जाता है। ओएनजीसी के सभी कार्य केंद्रों में अध्‍यक्ष एवं प्रबंध निदेशक द्वारा कर्मचारियों के लिए एक ऑनलाइन क्विज़ का शुभारंभ किया गया था और उन्‍हें प्रोत्‍साहित करने के लिए ओएनजीसी के अध्‍यक्ष एवं प्रबंध निदेशक द्वारा विजेताओं को मान्‍यता प्रमाण-पत्र दिए गए थे।

स्‍थानीय सुरक्षा जागरूकता अभियान के अलावा, विशिष्‍ट थीम के साथ प्रति वर्ष एक संपूर्ण संगठन स्‍तरीय सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाया जाता है। उनमें से कुछ के ब्‍योरे नीचे उपलब्‍ध कराए गए हैं:

हमसेफ अभियान : वर्ष 2012 में ''हमसेफ'' अभियान चलाया गया है। यह एक ऐसा अभियान है जो सुरक्षा के बारे में विचार करने और स्‍वयं के लिए तथा अपनी टीम के लिए सुरक्षित रूप से काम करने के लिए प्रत्‍येक व्‍यक्ति को प्रेरित करेगा। ओएनजीसी के कर्मचारियों का हमसेफ का वायदा : ''ओएनजीसी में एक स्‍थायी, सुरक्षित और विश्‍व स्‍तरीय कार्यचालन वातावरण स्‍थापित करने के लिए मैं स्‍वयं सुरक्षित रहने का और अपनी टीम तथा सहकर्मियों की सुरक्षा के लिए कोई कसर नहीं रखूंगा।''

ठेकेदार सुरक्षा कार्यशाला : संविदा कर्मियों के  बीच सुरक्षा की संस्‍कृति में सुधार करने के लिए ''एकसाथ सुरक्षित – कल'' और ''प्रभावी पर्यवेक्षण'' प्रमुख बात है। अभियान के अंतर्गत वित्‍तीय वर्ष 2010-11 की अवधि के दौरान ओएनजीसी और ठेकेदारों दोनों के वरिष्‍ठ प्रबंधन की सहभागिता से कार्यशालाओं की एक श्रृंखला आयोजित की गई थी।

व्‍यावसायिक स्‍वास्‍थ्‍य और औद्योगिक स्‍वच्‍छता पर कार्यशाला : 'स्‍वास्‍थ्‍य ही धन है' को बढ़ावा देने के लिए 'व्‍यावसायिक स्‍वास्‍थ्‍य और औद्योगिक स्‍वच्‍छता' पर एक एक-दिवसीय कार्यशाला का उदघाटन नई दिल्‍ली में श्री ए के हजारिका, पूर्व निदेशक (अपतट) द्वारा 23 दिसंबर, 2011 को किया गया था। श्री हजारिका ने विचार व्‍यक्‍त किए कि ओएनजीसी के कार्यबल के स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी स्‍तर की मॉनीटरिंग का सर्वोच्‍च महत्‍व था। मेडिको मीडिया, अहमदाबाद की डॉ मीना शाह ने स्‍वास्‍थ्‍य को एक शरीर, मन और आत्‍मा के गतिशील एकीकरण के रूप में परिभाषित किया।

आपातकालीन प्रत्‍युत्‍तर : तेल और गैस अन्‍वेषण तथा उत्‍पादन के क्रियाकलाप खतरनाक हैं। हालांकि डिजाइन के स्‍तरों पर अंत:निर्मित सुरक्षा प्रणालियां खतरा होने की संभावनाओं को काफी हद तक कम कर देती हैं, परंतु फिर भी हम आंतरिक और बाह्य संसाधन जुटाकर इस प्रकार की आपदाओं के परिणामों को समाप्‍त करने के लिए योजना बनाने हेतु पर्याप्‍त रूप से तैयार हैं। परिसंपत्ति स्‍तर पर आपदा प्रबंधन योजना (डीएमपी) और अलग-अलग संस्‍थापनाओं के लिए स्‍थान-विशिष्‍ट आपातकालीन प्रत्‍युत्‍तर योजना (ईआरपी), आपातकालीन प्रत्‍युत्‍तर का एक अभिन्‍न अंग है। सक्षम प्राधिकारियों द्वारा जिला स्‍तर पर ऑफसाइट डीएमपी योजना भी तैयार की गई है और अनुमोदित की गई है। निगमित डीएमपी को उस समय सक्रिय किया जाता है जब शीर्ष प्रबंधन के निर्णय में भारत सरकार को शामिल किए जाने की आवश्‍यकता होती है।

समर्पित संकटकालीन प्रबंधन दल

ब्‍लोआउट नियंत्रण और विभिन्‍न परिसंपत्तियों तथा बेसिनों के वेधन, वर्कओवर और उत्‍पादन के अन्‍य सभी संबंधित कार्य चार क्षेत्रीय संकटकालीन प्रबंधन दलों नामत: आरसीएमटी-राजमुंदरी, बड़ोदा, सिवसागर, मुंबई द्वारा किए जाते हैं। इन सभी चार दलों के प्रमुख अधिकारी प्रमुख-सीएमटी-प्रचालन के कार्यात्‍मक मार्गदर्शन के अधीन संबंधित प्रमुख-आरसीएमटी होंगे। ब्‍लोआउट को समाप्‍त करने के अलावा, ये दल निवारात्‍मक उपाय के भाग के रूप में किक सर्कुलेशन, उपकरण लेखा-परीक्षा, क्रिटिकल कूप समीक्षाओं, कर्मी दल के प्रशिक्षणों और आकस्मिकता योजना तैयार करने तथा एसओपी आदि में भी शामिल होते हैं। मुंबई में दल और अवसंरचना मुंबई अपतट की आवश्‍यकताएं पूरी करता है।

तेल छलकाव प्रबंधन :

ओएनजीसी ने 700 टन तक के तेल के छलकने पर पार पाने की स्‍तर-। की क्षमता है। इस उद्देश्‍य के लिए आवश्‍यक बूम, स्किमर्स और रसायन उपलब्‍ध हैं। स्‍तर-।। के लिए ओएनजीसी में भारतीय तट रक्षक के सहयोग से राष्‍ट्रीय तेल छलकाव आपदा आकस्मिकता योजना (एमओएस-डीसीपी) के कार्यान्‍वयन के लिए एमपीटी, जेएनपीटी और अन्‍य तेल कंपनियों के साथ समझौता ज्ञापनकिए हैं। उच्‍चतर मात्रा में (स्‍तर-।।।) के तेल के छलकाव पर पार पाने के लिए ओएनजीसी द्वारा अंतर्राष्‍ट्रीय प्रत्‍युत्‍तर एजेंसियां ऑयल स्पिल रेस्‍पॉंस लिमिटेड (ओएसआरएल), यूके की सदस्‍यता ग्रहण की गई है।