• कॉर्पोरेट प्रोफाइल

नया क्या है

निदेशक (प्रौ. एवं क्षे.से.)

निदेशक (प्रौ. एवं क्षे.से.)
शशि शंकर

श्री शशि शंकर ने, इस प्रतिष्ठित पद पर राष्‍ट्रपति द्वारा उनकी नियुक्ति के पश्‍चात 01 दिसंबर, 2012 से ओएनजीसी के निदेशक (प्रौद्योगिकी एवं फील्‍ड सेवाएं) के रूप में पदभार ग्रहण किया। श्री शशि शंकर ने सम्‍मानित भूमिका की जिम्‍मेदारी श्री यू.एन. बोस से संभाली, जो 30 नवंबर, 2012 को ओएनजीसी की सेवाओं से सेवानिवृत्‍त हुए।

ओएनजीसी में तीन दशकों से अधिक के प्रभावशाली व्‍यावसायिक अनुभव के साथ, श्री शंकर को विविधपूर्ण अन्‍वेषण एवं उत्‍पादन क्रियाकलापों में व्‍यापक अनुभव प्राप्‍त है और विभिन्‍न चुनौतीपूर्ण कार्यों में वेधन प्रचालनों के प्रमुख रहे हैं। एक उत्‍कृष्‍ट कार्य-निष्‍पादक श्री शंकर ने विभिन्‍न पुरस्‍कार प्राप्‍त किए, जिनमें ‘’यांग इंजीनियर अवार्ड’’ और ‘’ड्रिलिंग इंजीनियर ऑफ दॅ ईयर 1998’’ प्रमुख हैं। दिल्‍ली के निगमित कार्यालय में उनके आने से पहले मुंबई अपतट फील्‍डों में 12 वर्ष बिता कर श्री शंकर, ओएनजीसी के गहन/अति गहन जल अभियान की अगुआई वाले गहन जल बहु-विधा दल के प्रमुख थे। गहन जल समूह में तैनाती के दौरान महत्‍वपूर्ण योगदान हैं – गहन और अति गहन जल में 90 से अधिक कूपों का वेधन, एकीकृत कूप पूर्णता आधार पर रिग कांट्रेक्टिंग, गहन जल अन्‍वेषण के लिए एकत्रित सेवा संविदाओं का कार्यान्‍वयन, कंसाइनमेंट आधार पर वेधन बिटों की अधिप्राप्ति का आरंभण – जो एल1 सिद्धांत से एक निदर्शात्‍मक बदलाव है, गहन जल प्रचालनों में अति आधुनिक प्रौद्योगिकी का प्रारंभण, गहन जल कूपों की 24X7 ऑनलाइन मॉनीटरिंग और विभिन्‍न लागत अल्‍पीकरण पहलें, जिनके परिणामस्‍वरूप ओएनजीसी की बॉटमलाइन को महत्‍वपूर्ण बढ़ावा मिला है।

सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची के एक छात्र रहे उन्‍होंने इंडियन स्‍कूल ऑफ माइंस, धनबाद से पेट्रोलियम इंजीनियरी में स्‍नातक की उपाधि धारण की और इंदिरा गांधी राष्‍ट्रीय मुक्‍त विश्‍वविद्यालय से वित्‍तीय प्रबंधन में विशेषज्ञता के साथ अपना एमबीए पूरा किया। श्री शंकर ने आईआईएम, लखनऊ से अपना सामान्‍य प्रबंधन प्रशिक्षण किया और ‘शांगसप्‍तक’ कार्यक्रम के अंतर्गत आईएसबी, हैदराबाद में नेतृत्‍व विकास कार्यक्रम पूरा किया।

श्री शंकर, ओएनजीसी के आरंभ से इसके प्रौद्योगिकी एवं फील्‍ड सेवा कार्य के प्रमुख बनने वाले छठे निदेशक बने {1994 में ओएनजीसी के सूचीकरण से पहले तत्‍कालीन सदस्‍य (वेधन) और इसके बाद 2001 में सीआरसी के कार्यान्‍वयन तक निदेशक (वेधन)}