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निदेशक (अन्वे.)

निदेशक (अन्वे.)
ए. के. द्विवेदी

श्री अजय कुमार द्विवेदी ने भारत के प्रमुख अन्‍वेषक ओएनजीसी के महारत्‍न निदेशक मंडल में निदेशक (अन्‍वेषण) के रूप में बागडोर संभाला है। कानपुर विश्‍वविद्यायल के स्‍नातकोत्‍तर, श्री द्विवेदी का ओएनजीसी में 34 वर्ष का प्रतिष्ठित कैरियर है। उन्‍होंने मुंबई से लेकर, उत्‍तर में देहरादुन, दक्षिण में चैन्‍नै, पूर्व में जोरहाट, पश्चिम में वदोदरा के विभिन्‍न कार्य स्‍थलों पर प्रमुख अन्वेषण संबंधित कार्यभार और एमबीए बेसिन, कोलकाता में बेसिन प्रबंधक के रूप में कार्यभार संभाला है और  अंत में, बेसिन प्रबंधक के रूप में पश्चिम अप‍तट का कार्यभार संभाला।

श्री द्विवेदी ने पश्चिमी अपतट – कच्‍छ – सौराष्‍ट्र, मुंबई अपतट और केरल – कोंकण बेसिन में ओएनजीसी के प्रमुख अन्‍वेषण पोर्टफोलियो का प्रबंधन किया है। उनके नेतृत्‍व में पश्चिमी अपतटीय बेसिन ने 4 खोजों सहित 109 एमएमटी तेल और तेल समतुल्‍य गैस हासिल किया और सर्वश्रेष्‍ठ बेसिन का प्रतिष्ठित सीएमडी ट्रॉफी  जीती। इससे पूर्व, श्री द्विवेदी ने बेसिन प्रबंधक, महानदी, बंगाल एवं अंडमान बेसिन के रूप में इन तीनों बेसिनों के अन्‍वेषण निष्‍पादन का प्रबंधन किया। खंभात बेसिन के मेहसाणा – पाटन – राजस्‍थान के ब्‍लॉक प्रबंधक रूप में उनके कार्यकाल के दौरान, भू-वैज्ञानिक आंकड़ों का एकीकृत विश्‍लेषण शुरु किया जिससे भंडार अभिवृद्धि हुई, जिसके कारण इन ब्‍लॉकों से दो खोजें की गयीं। असम – असम – अराकान बेसिन के उत्‍तरी एवं दक्षिणी असम शेल्‍फ ब्‍लॉकों के ब्‍लॉक प्रबंधक के रूप में, उन्होंने तेल संपन्‍न फील्‍डों को कवर करते हुए छ: ऑनलैंड एक्रिऐज के अन्वेषण उत्‍पादन का कर्मठता से प्रबंधन किया, जिससे दो खोजें हुईं। श्री द्विवेदी ने ख्ंभात बेसिन के छ: अपतटीय ब्‍लॉकों और दो ऑनलैंड ब्‍लॉकों के कार्य निष्‍पादन का प्रबंधन किया, जिससे एक ऑनलैंड खोज हुई। श्री द्विवेदी ने विभिन्‍न नेल्‍प ब्‍लॉकों की प्रबंधन समितियों में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई।

लोक केन्द्रित दृष्टिकोण के साथ गहन विश्लेषणात्‍मक कौशल के वे धनी हैं। पूरे संगठन में, विभिन्‍न क्षमताओं में कार्य कर रहे बहु - विध टीम को प्रोत्‍साहित करना उनकी ताकत रही है। संगठनात्‍मक परिवर्तन कार्यक्रम संबंधी संयुक्‍त परियोजना टीम के एक प्रमुख सदस्‍य के रूप में श्री द्विवेदी परिसंपत्ति आ‍धारित मॉड्ल के अनुरूप संरचना प्रणाली और कारोबार प्रक्रियाओं को फिर से डिजाइन करने और दो प्रायोगिक परियोजनाओं में उन्‍हें कार्यान्वित करने के कार्य में शामिल थे। निदेशक (अन्‍वेषण) द्वारा गठित कार्य बल के सदस्‍य के रूप में, उन्हें, वर्ष 2020 तक आरक्षित अभिवृद्धि को दोगुना करने के लक्ष्‍य से ओनजीसी के लिए दीर्घावधि अन्‍वेषण रणनीति तैयार करने की जिम्‍मेवारी सौंपी गयी थी। उनकी समृद्ध शैक्षणिक परंपरा के अनुरूप श्री द्विवेदी ने कई तकनीकी पत्र लिखे हैं।  

उनमें से कुछ उल्‍लेखनीय पत्रों में लिडिंग इड्ज में जुलाई, 2006 के अंक में प्रकाशित, कावेरी बेसिन के एक मामले का अध्‍ययन – ‘एकाउस्टिक इंपिडेंस एज ए लिथोलोजिकल एंड हाइड्रोकार्बन इंडिकेटर’ है; वे ‘सिक्‍वेंस स्‍ट्रेटीग्राफी एंड सिस्‍टम ट्रैक्‍ट एनलायसिस ऑफ इयोसिन एंड मियोसिन सेडिमेंट्स इन कच्‍छ ऑफशोर, इंडिया’ और ‘हायड्रोकार्बन प्रोस्‍पेक्टिविटि परसेपशन ऑफ वेस्‍ट अंडमान एरिया ओवर द नाइनटी ईस्‍ट रिड्ज एंड अंडमान बैक आर्क बेसिन’ सह रचयिता हैं। उन्‍होंने ‘बॉम्‍बे अपतट बेसिन में लिथोस्‍ट्रेटीग्राफी के मानकीकरण’ विषय पर कार्यबल के एक सदस्‍य के रूप में योगदान किया। श्री द्विवेदी, सिक्‍वेंस स्‍ट्रेटीग्राफी के विशेषज्ञ, डॉ. ओक्‍टावियन केटेनियेनु के साथ भारत के सभी तलछटी बेसिनों में सिक्‍वेंस स्‍ट्रेटीग्राफी और पेट्रोलियम प्रणाली संबंधी परियोजना की संचालन समिति के प्रमुख थे।  

निरंतर विकास में दृढ़ विश्‍वास रखने वाले, श्री द्विवेदी ने, इंडियन स्‍कूल ऑफ बिजनेस, हैदराबाद और अल्‍बर्टा स्‍कूल ऑफ बिजनेस, अल्‍बर्टा, कनाडा में किए गए कार्य सहित विभिन्‍न विकासात्‍मक कार्यक्रम से गुजरे हैं। वे एसपीजी – भारत, एईजी – भारत और एसपीई से संबद्ध हैं और वर्तमान में, एसपीजी –भारत के अध्‍यक्ष हैं। श्री द्विवेदी उस समय ओएनजीसी के निदेशक मंडल मे शामिल हुए हैं, जब कारोबारी परिवेश न सिर्फ चुनौतीपूर्ण है, अपितु, अन्‍वेषण पर अधिक भार है।