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शिरीश बी. केदारे


शिरीश बी. केदारे

प्रोफेसर शिरीश बी. केदारे ने 1985 में आईआईटी, बंबई से मेकेनिकल इंजीनियरिंग में अपनी बी.टेक की उपाधि प्राप्‍त की। आपने ''रेसिप्रोकेटिंग विंड मशीन'' में आईआईटी, बंबई से 1992 में पीएच.डी. की उपाधि प्राप्‍त की। आपने ''विकास'' से संबंधित भिन्‍न-भिन्‍न मुद्दों पर कार्य करते हुए सामाजिक सेक्‍टर में एक वॉल्‍यंटियर के रूप में 3 वर्ष (1992-95) बिताए। आपने 1995 में ऊर्जा और पर्यावरण में अपनी इंजीनियरिंग परामर्शी सेवा आरंभ की। आपने अध्‍यक्ष, खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के तकनीकी परामर्शदाता के रूप में कार्य किया, जब आपने ग्रामीण उद्योग क्‍लस्‍टर के विकास से संबंधित मुद्दों पर कार्य किया। वर्तमान में आप एक प्रोफेसर के रूप में आईआईटी, बंबई के साथ संबद्ध हैं।

आप एक सहायक संकाय सदस्‍य के रूप में ऊर्जा विज्ञान एवं इंजीनियरी विभाग, आईआईटी, बंबई में शामिल हुए और साथ ही साथ कंपनी के निदेशक (अनुसंधान एवं विकास) के रूप में एक इंजीनियरी कंपनी क्लिक डेवलपमेंट्स लिमिटेड में भी रहे। भिन-भिन्‍न नवीकरणयोग्‍य ऊर्जा प्रणालियों पर अपने अध्‍ययनों के आधार पर आपने 1997 में औद्योगिक प्रक्रिया ताप अनुप्रयोगों के लिए संकेंद्रित सौर थर्मल क्‍लेक्‍टर विकसित करने की आवश्‍यकता की पहचान की। आपने एमएनआरई (नई एवं नवीकरणयोग्‍य ऊर्जा मंत्रालय), नई दिल्‍ली द्वारा प्रायोजित अरुण 160 (160 वर्ग मीटर फ्रेशनल पाराबोलोइड सोलर कंसनट्रेटर फॉर इंडस्ट्रियल प्रोसेस हीट) की आईआईटी, बंबई-क्लिक अनुसंधान एवं विकास परियोजना के अंतर्गत एक प्रधान अनुसंधाता (2004 से 2007 तक) कार्य किया। आपने मीडिया के रूप में स्‍टीम, प्रेशराइज्‍ड जल या थर्मिक फ्लुइड का इस्‍तेमाल करके और थर्मल पावर संयंत्रों में स्‍टीम के वृद्धिकरण के लिए विभिन्‍न प्रकार के वाणिज्यिक अनुप्रयोगों और औद्योगिक प्रक्रियाओं के लिए सौर संकेंद्रक प्रौद्योगिकी के एकीकरण पर भी कार्य किया।

भंडारण के साथ और भंडारण के बिना सौर औद्योगिक प्रक्रिया ताप प्रणालिणयों के इष्‍टतमीकरण के साथ-साथ आपका बल भारतीय परिस्थितियों के लिए उपयुक्‍त 24 घंटे कार्य करने वाले भंडारण के साथ सौर थर्मल पावर संयंत्र के विकास पर है। आप ग्रामीण क्षेत्रों के लिए प्रौद्योगिकी विकल्‍प केंद्र (सीटीएआरए), आईआईटी, बंबई के साथ भी संबद्ध हैं और ग्रामीण ऊर्जा तथा अन्‍य प्रौद्योगिकियों पर कार्य कर रहे हैं। वर्तमान में आप देश के भिन्‍न-भिन्‍न क्षेत्रों में इस्‍तेमाल किए जाने वाले परंपरागत लकड़ी से जलाए जाने वाले चूल्‍हों के लिए कार्य-निष्‍पादन सुधार हेतु लघु एवं किफायती उपकरणों के समस्‍या मूल्‍यांकन और विकास एवं प्रसार पर ध्‍यान केंद्रित कर रहे हैं।